राजधानी
दिल्ली में फिर से नाबालिग के साथ गैंगरेप की शर्मनाक घटना ने प्रशासन को
कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है और पूछा है आखिर कब तक...देश की राजधानी
दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हो गई ..,देश की राजधानी दिल्ली में फिर नाबालिग
से बलात्कार की घिनौनी वारदात सामने आई
है। यह बलात्कार पांच साल की बच्ची से हुआ है। एक तरफ पूरे देश में
नवरात्रि के मौके पर कन्या जगह-जगह कन्या पूजन हो रहा है, जिन्हें जिमाया
जाता है अब बलात्कार का निशाना उन् कन्याओ को बनाया जा रहा है जिन होने अभी
कुछ नहीं देखा ..आज जब उन् कन्याओं की पूजा की जा रही है तो ऐसो खबर सुन
कर दिल दहल जाता है ... ।नवरात्र के आठवें और नौवें दिन कन्या पूजन का
विधान होता है. भारत में जहां एक तरफ कन्या भ्रूण हत्या और महिलाओं से
बलात्कार की घटनाएं अपने चरम पर हैं ...ये बेटियों तो विसुद रूप से पैदा
नही होने दी गयी या पैदा होने के बाद जिंदगी की उमंगो से इन्हे महरूम कर
दिया गया । लेकिन दिल्ली में दिल दहलाने वाली घटना में एक कन्या को कैद कर
एक दरिंदे ने उसके साथ बलात्कार किया। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके
में किराये पर रहने वाले एक युवक ने पांच साल की मासूम से लगातार दो दिनों
तक रेप किया। च्ची की हालत फिलहाल गंभीर है। डॉक्टरों ने बच्ची के पेट से
एक मोमबत्ती और एक शीशी भी निकाली है।बच्ची के साथ आरोपी किस दरिंदगी से
पेश आया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे ब्लेड मारकर मारने
की कोशिश भी की गई। फिलहाल मासूम अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
इस बीच बीते 24 घंटे में दिल्ली में तीन बलात्कार की वारदात सामने आई है।
न्यू अशोक नगर इलाके में तीन युवकों ने स्कूल जा रही 15 साल की लड़की के
साथ गैंगरेप किया। दूसरी तरफ नानकपुरा में नेपाली मूल की लड़की ओवरब्रिज के
पास अर्धनग्न हालत में पाई गई और उसके साथ भी रेप किया गया। जिस भारतवर्ष
में कन्या को देवी के रूप में पूजा जाता है, वहां आज सर्वाधिक अपराध
कन्याओं के प्रति ही हो रहे हैं. ..यूं अब पीड़ित बच्ची के पिता की एक ही
गुहार है। उनकी बच्ची की ऐसी हालत करने वाले को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
मालूम हो कि दिल्ली के वसंतकुंज गैंगरेप के बाद देश में जो गुस्सा फूटा था
उसके बाद सरकार ने कानून में बदलाव कर उसे और कड़ा बनाने की कोशिश की,
लेकिन ऐसा लगता है कि सख्त कानून भी बलात्कार को रोकने में कामयाब नहीं हो
रहे हैं। फिलहाल सब यही दुआ कर रहे हैं कि बच्ची की जान बच जाए।
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